
मानसून की बौछारों के बाद पानी से लबालब हो गई मौसमी नदी, बाढ़ का खतरा बना
फतेहाबाद, 21 जुलाई। हरियाणा में घग्गर नदी एक बार फिर से उफान पर है। नदी के तटबंध कमजोर हैं और मानसून की बौछारों के बाद यह नदी पूरी तरह से लबालब हो गई है। सिंचाई विभाग से मिली जानकारी के अनुसार चांदपुरा हैड पर इस समय करीब 9000, खनौरी में 6500, गुहला चीका में करीब 11000 क्यूसेक पानी है। सिरसा जिला के ओटू वियर से नहरों में करीब ढाई हजार क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार पहाड़ी इलाकों से लेकर मैदानी इलाकों में बरसात का सिलसिला लगातार जारी है। इस बार मानसून का प्रभाव काफी अधिक माना जा रहा है। मौसम विभाग पहले ही चेतावनी दे चुका है कि आम जनमानस नहरों और नदियों से दूर रहे। ऐसे में हरियाणा से गुजरने वाली भारत-पाकिस्तान की इकलौती मौसमी नदी एक बार फिर से अपना रौद्र रूप दिखाती हुई नजर आ रही है। वैसे भी हर साल मानसून में पंजाब और हरियाणा के लोग बरसात के मौसम में घग्गर नदी से भयभीत रहते हैं। खास बात यह है कि साल भर किसानों के लिए जीवनदायिनी घग्गर नदी मानसून की बौछारों के बाद संकटदायिनी बन जाती है। ऐसे में मानसून में किसानों व ग्रामीणों को यह डर रहता है ना जाने घग्गर का रौद्र रूप उनके खेत खलियान और घरों पर कहर बरपा देगा? आपकी जानकारी के लिए बता दें आजादी के बाद घग्गर नदी हरियाणा और पंजाब राज्यों में 14 बार कहर बरपा चुकी है। साल 2010 में आई बाढ़ के बाद हरियाणा के फतेहाबाद से लेकर सिरसा में हजारों एकड़ भूमि में खड़ी फसल तबाह हो गई थी। अनेक गांव पानी में डूब गए थे।
पहले भी कई बार कहर बरपा चुकी है घग्गर नदी
इससे पहले नदी में साल 1976, 1981, 1984,1988, 1993, 1994, 1995, 1996, 1997, 2000, 2004, 2010 और 2015 में बाढ़ आ चुकी है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन की एक रिपोर्ट के अनुसार साल 1993, 1995, 2004 और 2010 में आई बाढ़ से पंजाब और हरियाणा की जनता को सबसे अधिक नुकसान झेलना पड़ा। हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में घग्गर नदी का कुल 50000 वर्ग किलोमीटर केचमेंट एरिया है। हिमाचल के सिरमौर जिला में करीब 1490 मीटर ऊंची शिवालिक पहाडिय़ों से घग्गर नदी का उद्गम होता है। पाकिस्तान तक इस नदी की कुल लंबाई 646 किलोमीटर है। नदी का 70 फ़ीसदी से अधिक क्षेत्र पंजाब और हरियाणा में है। मानसून में तेज बारिश इस नदी को उफान पर ला देती है। पहाड़ों की बरसात के अलावा चंडीगढ़, पटियाला, पंचकूला सहित कई इलाकों का बरसाती पानी मौसमी नदी घग्गर में गिरता है। हिमाचल के सिरमौर में मानसून में लगभग 1100, चंडीगढ़ में 840, पंचकूला में 900 जबकि पटियाला में 550 मिलीमीटर होने वाली बरसात इस नदी को पानी से लबालब कर देती है। इसके अलावा पिछले दो दशक में पंजाब और हरियाणा में 1200 से अधिक पाइपलाइन बनी हैं। इन पाइपलाइंस के जरिए करीब 12 लाख हेक्टेयर भूमि को पानी मिलता है। इसके अलावा नदी के तटबंध कमजोर हैं। हरियाणा के सिरसा, फतेहाबाद, गुहला चीका, सरदूलगढ़ में तो कई जगह नदी पर सरकारी बांध भी नहीं बना हुआ है। ऐसे में हर साल पंजाब और हरियाणा की लगभग 20 लाख से अधिक आबादी को परोक्ष रूप से नदी में आई बाढ़ की वजह से दिक्कत का सामना करना पड़ता है एक बार फिर से घग्र नदी बरसाती पानी से लबालब है बंद कमजोर हैं। कभी भी दरक सकते हैं। कहते हैं हादसों से सबक लेना चाहिए, लेकिन घग्गर नदी के कमजोर तटबंध से यह जाहिर हो जाता है कि प्रशासन को लोगों की जान और माल की परवाह नहीं है। दुष्यंत की पंक्तियां हैं…बाढ़ की संभावनाएं सामने हैं और नदी किनारे घर बने हैं, जिस तरह से चाहे बजाइए हमें हम आदमी नहीं झुनझुने हैं।