गणतंत्र के बाद दिल्ली की चुनावी फिजां अचानक से ऐसी बदलेगी कि ‘जंग’ की तरह दिख सकता है चुनाव!

जन सरोकार ब्यूरो/आरके सेठी
नई दिल्ली, 25 जनवरी। सियासत की धुरंधर ‘प्लेयर’ बीजेपी देशभर में जमकर खेल लेती है लेकिन दिल्ली पहुंचते-पहुंचते 25 सालों से ‘फिसलती’ ही आ रही है। अबकी बार बीजेपी को लगता है कि दिल्ली की ‘आबो-हवा’ समझने में रही चूकों से उसने सबक ले लिया है और इस बार दिल्ली में भगवा झंडा गाड़ ही देगी। वहीं, दूसरी ओर खुद को ईमानदारी का ‘बादशाह’ मानने वाले अरविंद केजरीवाल सत्ता छोडऩे के मूड में नहीं दिख रहे। दरअसल, केजरीवाल को यह बात अच्छे से मालूम है कि दिल्ली को जो चाहिए, वह वो दे पा रहे हैं या देने का वादा कर चुके हैं। इसलिए वह इस कांफिडेंस में भी हैं कि बीजेपी ने ‘फ्री’ के वादे भले ही कितने भी कर लिए हों लेकिन उनके जितने फिर भी नहीं कर पाई है। हालांकि, दिल्ली इलेक्शन में अबकी बार पब्लिक की चुप्पी थोड़ी रहस्यमयी है। यह चुप्पी नतीजों के रूप में क्या कर गुजरने वाली है, किसी को नहीं मालूम। हां, इतना तय है कि इस बार चुनाव को बीजेपी लडऩे के लिए नहीं बल्कि जीतने के लिए लड़ती दिख रही है। यानी, केजरीवाल दिल्ली को जीतें या हारें लेकिन बीजेपी उन्हें ‘रूला’ जरूर देगी।
बीजेपी जब केजरीवाल को ‘महाठग’, ‘भ्रष्ट’, ‘धुर्त’, ‘बेईमान’, ‘झूठा’ और ना जाने क्या-क्या कहती है, तो इसका मतलब सिर्फ यह ही नहीं कि बीजेपी ‘बड़बोली’ है। बल्कि, केजरीवाल की पब्लिक इमेज पर डैमेज करने की बीजेपी की रणनीति का हिस्सा है। चूंकि, बीजेपी यह समझ चुकी है कि कॉमन मैन केजरीवाल में खुद की झलक देखने लगा है तो यह बीजेपी के लिए जरूरी है कि लोगों को केजरीवाल में वह दिखे, जो बीजेपी दिखाना चाहती है। केजरीवाल की सिक्योरिटी इश्यू पर दिल्ली में जो सियासी उबाल आया, उसके पीछे भी यही माना जा रहा है कि केजरीवाल को मानसिक रूप से ‘तोडऩे’ की यह एक छोटी सी कोशिश भर रही। यह कहना भी गलत नहीं होगा कि बीजेपी अपने मकसद में कुछ कामयाब भी हुई। क्योंकि, सिक्योरिटी मसले के अगले ही दिन केजरीवाल ने जब वीडियो जारी कर बीजेपी पर हमला बोला तो उनके शब्दों और बॉडी लैंग्वेज में ‘लाचारगी’ झलकती दिखी। वीडियो में जब उन्होंने दिल्ली के लोगों से अपना वोट ना बेचने की बात जिस अंदाज और जोर देकर कही, उससे लगा कि उन्हें भी महसूस हो गया है कि बीजेपी इस बार बहुत ‘आक्रामक’ है और साम-दाम-दंड-भेद का खुल कर इस्तेमाल करेगी।
आम आदमी पार्टी से जुड़े सूत्रों की बात पर यकीन करें तो पार्टी इस बात को लेकर बेहद फिक्रमंद है कि लोग विकास और काम ना होने के विषय पर पब्लिकली सवाल करने लगे हैं। पार्टी से जुड़े लोगों का मानना है कि भ्रष्टाचार के केसों में खुद केजरीवाल और उनकी आधी सरकार जेल जा आई है तो दिल्ली के लोगों में इसका नेगेटिव इम्पैक्ट उन्हें खुद भी दिख रहा है। तीसरी बार सरकार बनाने के लिए केजरीवाल की टीम के पास बहुत बड़े मुद्दे, ऐसे मुद्दे अब हैं नहीं जो उन्हें औरों से अलग दिखा सकें। आप के एक नेता का कहना है कि पार्टी चुनाव तो जीत जाएगी लेकिन इस समय वह मुश्किल दौर में है। माना जा रहा है कि आम आदमी पार्टी के ‘बकाया’ वादों और बुनियादी जरूरतों के पूरा ना होने का मसला इस बार दिन-ब-दिन बढ़ेगा और आम आदमी पार्टी के पास इसका कोई माकूल जवाब भी नहीं होगा।
बीजेपी के रणनीतिकारों की टीम का हिस्सा एक लीडर ने बताया कि बीजेपी दिल्ली के एक-एक वोटर तक पहुंच रही है। जिस क्षेत्र में जिस स्टेट के वोटर ज्यादा रहते हैं, वहां उसी स्टेट या क्षेत्र के लीडरों को उनके बीच वोट मांगने भेजा जा रहा है। 70 सीटों पर केंद्रीय मंत्रियों से लेकर कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों, सांसदों और विधायकों की डयूटियां लगा दी गई हैं। दिल्ली की दो-दो सीट पर एक केंद्रीय मंत्री को जिम्मेदारी सौंपी गई है तो यह भी टारगेट है कि वर्कर इस तरह से काम करें कि हर सीट पर पिछली बार से कम से कम 20 हजार वोट ज्यादा आएं।
इसके अलावा, माना जा रहा है कि गणतंत्र दिवस के बाद से बीजेपी ‘फुल एक्शन’ में आ जाएगी। दिल्ली की चुनावी फिजां दोनों की पार्टियों के लिए बदली-बदली महसूस होगी। दिल्ली की सियासत को करीब से जानने वाले लोगों का कहना है कि इस बार दिल्ली में सत्ता की जंग नया इतिहास लिखेगी।